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Monday, 26 April 2021

साखी - कबीर

 


साखी - कबीर

निम्न  प्रश्नों  के उत्तर  २-३ पंक्तियों में  दे-     (२ अंक)

  1.  मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है?

  2. दीपक दिखाई देने पर अँधियारा कैसे मिट जाता है? साखी के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

  3. अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने क्या उपाय सुझाया है?

  4. 'ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होई' - इस पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?

निम्न प्रश्नों के उत्तर ५०-६०  पंक्तियों में लिखिए (५ अंक)

  1. कबीर की उद्धृत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।

  2. कबीर ने साखियों के माध्यम से हमें कौन-कौन से संदेश दिए हैं?

  3. संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन? यहाँ ‘सोना’ और ‘जागना’ किसके प्रतीक हैं? इसका प्रयोग यहाँ क्यों किया गया है? स्पष्ट कीजिए।



Wednesday, 21 April 2021

पदबंध

 


पाठ का नाम

पदबंध


पद- वाक्य से अलग रहने पर 'शब्द' और वाक्य में प्रयुक्त हो जाने पर शब्द 'पद' कहलाते हैं।

दूसरे शब्दों में- वाक्य में प्रयुक्त शब्द पद कहलाता है।

 

पदबंध - जब दो या दो से अधिक पद मिलकर एक पद का कार्य करते हैं तब उन्हें पदबंध कहा जाता है।

जैसे-

(1) सबसे तेज दौड़ने वाला छात्र जीत गया।

(2) यह लड़की अत्यंत सुशील और परिश्रमी है।

(3) नदी बहती चली जा रही है।

(4) नदी कल-कल करती हुई बह रही थी।

पदबंध के भेद

मुख्य पद के आधार पर पदबंध के पाँच प्रकार होते हैं-

(1) संज्ञा-पदबंध

(2) विशेषण-पदबंध

(3) सर्वनाम पदबंध

(4) क्रिया पदबंध

(5) क्रियाविशेषण

(1) संज्ञा-पदबंध- वह पदबंध जो वाक्य में संज्ञा का कार्य करे, संज्ञा पदबंध कहलाता है।

दूसरे शब्दों में- पदबंध का अंतिम अथवा शीर्ष शब्द यदि संज्ञा हो और अन्य सभी पद उसी पर आश्रित हो तो वह 'संज्ञा पदबंध' कहलाता है।

जैसे-

(a) चार ताकतवर मजदूर इस भारी चीज को उठा पाए।

(b) राम ने लंका के राजा रावण को मार गिराया।

(c) अयोध्या के राजा दशरथ के चार पुत्र थे।

(d) आसमान में उड़ता गुब्बारा फट गया।

(2) विशेषण पदबंध- वह पदबंध जो संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बतलाता हुआ विशेषण का कार्य करे, विशेषण पदबंध कहलाता है।

दूसरे शब्दों में- जब एक से अधिक पद मिलकर विशेषण पद का कार्य करें, तो उसे विशेषण पदबंध कहा जाता हैं।

जैसे-

(a) तेज चलने वाली गाड़ियाँ प्रायः देर से पहुँचती हैं।

(b) उस घर के कोने में बैठा हुआ आदमी जासूस है।

(c) उसका घोड़ा अत्यंत सुंदर, फुरतीला और आज्ञाकारी है।

(d) बरगद और पीपल की घनी छाँव से हमें बहुत सुख मिला।

(3) सर्वनाम पदबंध- वह पदबंध जो वाक्य में सर्वनाम का कार्य करे, सर्वनाम पदबंध कहलाता है।

दूसरे शब्दों में- जब कई पद मिलकर सर्वनाम पद का कार्य करें, तो उसे सर्वनाम पदबंध कहा जाता है।

जैसे-

बिजली-सी फुरती दिखाकर आपने बालक को डूबने से बचा लिया।

शरारत करने वाले छात्रों में से कुछ पकड़े गए।

विरोध करने वाले लोगों में से कोई नहीं बोला।

 

(4) क्रिया पदबंध- वह पदबंध जो अनेक क्रिया-पदों से मिलकर बना हो, क्रिया पदबंध कहलाता है।

दूसरे शब्दों में- जब कई क्रियाएँ मिलकर एक क्रिया पद का कार्य करें, तो उसे क्रिया पदबंध कहा जाता है।

जैसे-

(a) वह बाजार की ओर आया होगा

(b) मुझे मोहन छत से दिखाई दे रहा है।

(c) सुरेश नदी में डूब गया।

(d) अब दरवाजा खोला जा सकता है।

(5) क्रियाविशेषण पदबंध- वह पदबंध जो वाक्य में अव्यय का कार्य करे, अव्यय पदबंध कहलाता है।

दूसरे शब्दों में- जब कई पद मिलकर क्रियाविशेषण पद का कार्य करते हैं, तो उसे क्रियाविशेषण या अव्यय पदबंध कहा जाता हैं।

जैसे-

वह बहुत सुंदर नाची। 

वह बहुत धीरे-धीरे चलता है।

आज मैंने पेट भरकर खाना खाया। 

आप आराम से बैठकर बातें कीजिए।

अभ्यास कार्य

निम्न वाक्यों के रेखांकित भाग में पदबंध का नाम बताइये। 

1.  युद्ध में लड़ने वाला सिपाही शहीद हो गया। 

2.  तकदीर का मारा मैं कहाँ फँस गया। 

3.  बच्चे जल्दी सो जाया करते है। 

4.  मैंने बहुत सुंदर हिरण देखा। 

5.  मैं कल शाम चार बजे तक पहुचूँगा। 

6.  लड़का पागलों की तरह हँस रहा है।  

7.  दशरथ के चारों पुत्र वीर थे। 

8.  मैं बिहार की राजधानी पटना में रहता हूँ। 

9.  बिजली-सी फुरती दिखाकर आपने बालक को गिरने से बचा लिया।

10.  इतनी लगन से काम करने वाला मैं असफल नहीं हो सकता।


Thursday, 15 April 2021

अनुच्छेद लेखन


अनुच्छेद लिखते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए -

1) अनुच्छेद लिखने से पहले रूपरेखा, संकेत-बिंदु आदि बनानी चाहिए। (कुछ प्रश्न-पत्रों में पहले से ही रूपरेखा, संकेत-बिंदु आदि दिए जाते हैं। आपको उन्हीं रूपरेखा, संकेत-बिंदु आदि को ध्यान में रखते हुए अनुच्छेद लिखना होता है।)


(2) अनुच्छेद में विषय के किसी एक ही पक्ष का वर्णन करें। (ऐसा इसलिए करना आवश्यक हो जाता है क्योंकि अनुच्छेद में शब्द सिमित होते हैं और हमें अनुच्छेद संक्षेप में लिखना होता है।)


(3) भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली होनी चाहिए। ताकि समीक्षक या पढ़ने वाला आपके अनुच्छेद से प्रभावित हो सके।


(4) एक ही बात को बार-बार न दोहराएँ। क्योंकि एक ही बात को बार-बार दोहराने से आप अपने अनुच्छेद को दिए गए सीमित शब्दों में पूरा नहीं कर पाएँगे और अपने संदेश को लोगों तक नहीं पहुँचा पाएँगे।


(5) अनावश्यक विस्तार से बचें, लेकिन विषय से न हटें। आपको भले ही संक्षेप में अपने अनुच्छेद को पूरा करना है, परन्तु आपको ये भी ध्यान रखना है कि आप अपने विषय से न भटक जाएँ।


(6) शब्द-सीमा को ध्यान में रखकर ही अनुच्छेद लिखें। ऐसा करने से आप अपने अनुच्छेद में ज्यादा-से-ज्यादा महत्वपूर्ण बात लिखने की ओर ध्यान दे पाएँगे।


(7) पूरे अनुच्छेद में एकरूपता होनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि कही कोई बात विषय से अलग लगे और पढ़ने वाले का ध्यान विषय से भटक जाए।


(8) विषय से संबंधित सूक्ति अथवा कविता की पंक्तियों का प्रयोग भी कर सकते हैं। इससे आपका अनुच्छेद बहुत अधिक प्रभावशाली और रोचक लगेगा।


(9) अनुच्छेद के अंत में निष्कर्ष समझ में आ जाना चाहिए यानी विषय समझ में आ जाना चाहिए।


अनुच्छेद की प्रमुख विशेषताएँ -


(1) अनुच्छेद किसी एक भाव या विचार या तथ्य को एक बार, एक ही स्थान पर व्यक्त करता है। इसमें अन्य विचार नहीं रहते।


(2) अनुच्छेद के वाक्य-समूह में उद्देश्य की एकता रहती है। अप्रासंगिक बातों को हटा दिया जाता है। केवल बहुत अधिक महत्वपूर्ण बातों को ही अनुच्छेद में रखा जाता है।


(3) अनुच्छेद के सभी वाक्य एक-दूसरे से गठित और सम्बद्ध होते है। वाक्य छोटे तथा एक दुसरे से जुड़े होते हैं।


(4) अनुच्छेद एक स्वतन्त्र और पूर्ण रचना है, जिसका कोई भी वाक्य अनावश्यक नहीं होता।


(5) उच्च कोटि के अनुच्छेद-लेखन में विचारों को इस क्रम में रखा जाता है कि उनका आरम्भ, मध्य और अन्त आसानी से व्यक्त हो जाए और किसी को भी समझने में कोई परेशानी न हो।


(6) अनुच्छेद सामान्यतः छोटा होता है, किन्तु इसकी लघुता या विस्तार विषयवस्तु पर निर्भर करता है। लेखन के संकेत बिंदु के आधार पर विषय का क्रम तैयार करना चाहिए।


(7) अनुच्छेद की भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए।


.निम्न में से किसी एक  विषय पर अनुच्छेद   लिखिए-


1.जीवन में खेलकूद का महत्व (कक्षा-कार्य)

2.समय का सदुपयोग    (गृहकार्य)                     

3.व्यायाम    (गृहकार्य) 





बडे भाईसाहब

 


Friday, 1 May 2020

सूचना लेखन प्रारूप





डायरी का एक पन्ना


गृहकार्य (नोट-बुक)

प्रश्न-1. कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था? (2)

प्रश्न-2. लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेत देना चाहते थे। (2)

प्रश्न-3. 6 जनवरी, 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गईं? (2)

प्रश्न-4. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था? (2)

प्रश्न-5. 'जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।' यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए। (5)

प्रश्न-6. डायरी का एक पन्नापाठ का संदेश क्या है? (5)


पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए -
1. 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गई?
उत्तर:- 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए कलकत्तावासियों ने अनेक तैयारियाँ की थी जैसे लोगों ने अपने मकानों को खूब सजाया था, शहर के प्रत्येक भाग में राष्ट्रीय झंडे लगाए गए थे, कुछ लोगों ने तो अपने घर और मकानों को ऐसे सजाया था जैसे स्वतंत्रता प्राप्त ही हो गई हो। मोनुमेंट के नीचे शाम को झंडा फहराने और सभा का आयोजन किया गया था

2. आज जो बात थी वह निराली थी' - किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:- 26 जनवरी का दिन अपने आप में ही निराला था क्योंकि इस दिन को निराला बनाने के लिए कलकत्तावासी हर संभव प्रयास कर रहे थे ।निषेधाज्ञा के बावजूद सैंकड़ों लोग तीन बजे से ही पार्क में पहुँच रहे थे। स्त्रियाँ भी जुलूस में बढ़-चढ़कर भाग ले रही थी। लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूम रहे थे और जगह -जगह राष्ट्रीय झंडे फहरा रहे थे

3. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?
उत्तर:- पुलिस कमिश्नर के नोटिस में कहा गया कि अमुक-अमुक धारा के अनुसार सभा नहीं हो सकती यदि आप सभा में भाग लेंगे तो दोषी समझे जाएँगे कौंसिल के नोटिस में कहा गया कि मोनुमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी ऐसा खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी पुलिस कमिश्नर के नोटिस में जहाँ सरकार अपना भय दिखाकर जनता के ऊपर अपने मनमाने कानूनों को थोप रहीं थीं ,वहीँ पर आम जनता ऐसे कानूनों का उल्लघंन कर अपनी देशभक्ति का परिचय दे रही थी।

4. धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?
उत्तर:- पुलिस की जनता पर लाठियाँ बरसाने, लोगों के घायल होने और सुभाष बाबू की गिरफ्तारी के कारण धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस टूट गया।

5. डॉ. दास गुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख तो कर ही रहे थे, उनके फोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:-डॉ. दास गुप्ता द्वारा लोगों की फोटो खींचने की वजह यह थी कि पूरा देश अंग्रेज़ी सरकार के इस अमानवीय कृत्य को देखे और प्रेरित होकर अंग्रेजों का विरोध करें और देश से अंग्रेजों को बाहर करने में अपना सहयोग दें। समाचार पत्रों में इन्हें छपवाकर सारे देश को इसके बारे में बताया जा सके

 6. सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?
उत्तर:- सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की विशेष और बड़ी अहम भूमिका रही थी स्त्रियों ने अपने-अपने तरीकों से जुलूस निकाला। जानकी देवी और मदालसा बजाज जैसी स्त्रियों ने जुलूस का सफल नेतृत्व किया। झंडोत्सव में पहुँचकर मोनुमेंट की सीढियों पर चढ़कर झंडा फहराकर घोषणा पत्र पढ़ा। करीब 105 स्त्रियों ने पुलिस को अपनी गिरफ्तारी दी और अंग्रेजों के अत्याचार का सामना किया।

7. जुलूस के लाल बाजार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?
उत्तर:- जुलूस के लाल बाज़ार पहुँचते ही पुलिस ने जुलूस पर लाठियाँ बरसाना शुरू कर दिया। सुभाष बाबू को पकड़कर जेल भेज दिया गया। मदालसा बजाज भी पुलिस द्वारा पकड ली गई। इस जुलूस में कई लोग घायल और गिरफ्तार हुए

8. 'जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।' यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर:- यहाँ पर पुलिस कमिश्नर के द्वारा कानून को भंग करने की बात की गई है - इस कानून के अनुसार किसी भी प्रकार की सभा को आयोजित या उसमें भाग लेने की मनाही थी।
मेरे विचार से यह कानून भंग करना अति आवश्यक था क्योंकि यदि ऐसा किया जाता तो देश में स्वंतन्त्रता की आग को और बढ़ावा मिलता। साथ ही अंग्रेजों के कानून को भंग करना उनके लिए खुली चुनौती थी कि यह देश भारतीयों का था, है और रहेगा।

9. बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:- मेरे अनुसार यह दिन अपूर्व इसलिए था क्योंकि इससे पहले कलकत्ता में इतने बड़े स्तर पर जुलूस नहीं निकाला गया था और ही इस प्रकार से सरकार को खुली चुनौती दी गई थी। स्त्रियों का इतनी बड़ी संख्या में भाग लेना और अपनी गिरफ्तारी देना भी इस दिन को अपूर्व बनाता है।

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए -
10. आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया।
उत्तर:- इस पंक्ति का आशय यह है कि इस आंदोलन के पहले यह कहा जाता था कि कलकत्तावासी देश के लिए अधिक कार्य नहीं करते हैं और यह बात यहाँ के निवासियों के लिए एक कलंक के समान थी परन्तु 26 जनवरी 1931 के दिन को यादगार और अपूर्व बनाकर कलकत्तावासियों ने इस कलंक को पूरी तरह से धो दिया।

11. खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले कहीं नहीं की गई थी।
उत्तर:- इस पंक्ति का आशय यह है कि पुलिस कमिश्नर के नोटिस की परवाह करते हुए कलकत्तावासियों ने अपनी निडरता, साहस, शक्ति और देशभक्ति का अनूठा परिचय दिया था। ऐसा पहली बार हुआ था जब जनता ने सरकार को खुला चैलेंज देकर सभा आयोजित की थी


• प्रश्न-अभ्यास (मौखिक)
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए -
12. कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर:- कलकत्ता वासियों के किए 26 जनवरी 1931 का दिन इसलिए महत्त्वपूर्ण था क्योंकि पिछले वर्ष गुलाम भारत ने पहली बार इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया था और इस वर्ष कलकत्तावासी इस दिन की वर्षगाँठ मनाने वाले थे

13. सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?
उत्तर:- सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था।

14. विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर:- विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया ,साथ ही उनके साथ आए लोगों को मार-पीटकर उस जगह से हटा दिया गया।

15. लोग अपने-अपने मकानों सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेत देना चाहते थे?
उत्तर:- लोग अपने-अपने मकानों सार्वजानिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर अपनी देशभक्ति का प्रमाण, राष्ट्रीय झंडे का सम्मान तथा देश की स्वंत्रतता की ओर संकेत देना चाह रहे थे।

16. पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों तथा मैदानों को क्यों घेर लिया था?
उत्तर:- पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों तथा मैदानों को लोगों को स्वतंत्रता दिवस मनाने से रोकने के लिए घेर लिया था। पुलिस चाहती थी कि वहाँ लोग एकत्रित होकर झंडा फहरा सकें